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गीता जयंती
शिशिर ऋतु · 19 दिसंबर 2026

गीता जयंती

गीताजयन्ती · भगवद्गीता का अवतरण

पर्व विवरण
इस वर्ष की तिथि

19 दिसंबर 2026

कब

मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी · गीता जयंती

अवधि

१ दिन

आराध्य देव
कृष्ण
परिचय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

गीता जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें कुरुक्षेत्र की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।


उत्पत्ति

शास्त्र और लोक दोनों में गीता जयंती की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और अर्जुन की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।

क्यों मनाया जाता है

यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि कुरुक्षेत्र हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

कथा

पुराण-कथाओं में गीता जयंती से जुड़ी कथाएँ कुरुक्षेत्र के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।

कहानियाँ और प्रसंग

अर्जुन और अन्य क्षेत्रों में गीता जयंती की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।

विधि एवं परंपरा

स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और कुरुक्षेत्र से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।

कहाँ मनाया जाता है

मुख्य रूप से अर्जुन; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।

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गीता, देवता और पर्व — सरल भाषा में, घर में पढ़े जाने लायक।

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