
वसंत ऋतु · 19 अप्रैल 2026
परशुराम जयंती
परशुरामजयन्ती · परशुराम अवतार दिवस
पर्व विवरण
परिचय
ॐ परशुरामाय नमः
परशुराम जयंती सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें परशु की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।
उत्पत्ति
शास्त्र और लोक दोनों में परशुराम जयंती की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और क्षत्रिय की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।
क्यों मनाया जाता है
यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि परशु हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
कथा
पुराण-कथाओं में परशुराम जयंती से जुड़ी कथाएँ परशु के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।
कहानियाँ और प्रसंग
क्षत्रिय और अन्य क्षेत्रों में परशुराम जयंती की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।
विधि एवं परंपरा
स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और परशु से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।
कहाँ मनाया जाता है
मुख्य रूप से क्षत्रिय; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।
