
शरद ऋतु · 26 सितंबर 2026 – 9 अक्टूबर 2026
पितृ पक्ष
पितृपक्षः · पूर्वजों का पक्ष
पर्व विवरण
26 सितंबर 2026 – 9 अक्टूबर 2026
भाद्रपद पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या
१५ दिन
परिचय
ॐ पितृभ्यो नमः
पितृ पक्ष सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है जिसमें श्राद्ध की स्मृति और साधना केंद्र में रहती है। भक्त इस दिन व्रत, पूजा और दान से जीवन को शुद्ध करते हैं।
उत्पत्ति
शास्त्र और लोक दोनों में पितृ पक्ष की जड़ें गहरी हैं। तिथि, कथा और तर्पण की परंपराएँ मिलकर इस पर्व को अर्थ देती हैं।
क्यों मनाया जाता है
यह पर्व इसलिए मनाया जाता है कि श्राद्ध हमें कर्तव्य, भक्ति और संतुलन सिखाता है। परिवार और समाज एक साथ श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
कथा
पुराण-कथाओं में पितृ पक्ष से जुड़ी कथाएँ श्राद्ध के माध्यम से धर्म की रक्षा और भक्त की रक्षा का संदेश देती हैं।
कहानियाँ और प्रसंग
तर्पण और अन्य क्षेत्रों में पितृ पक्ष की लोककथाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती हैं, जिससे पर्व जीवित रहता है।
विधि एवं परंपरा
स्नान-पूजन, मंत्र जप, व्रत या फलाहार, दीपदान, और श्राद्ध से जुड़े पारंपरिक प्रसाद।
कहाँ मनाया जाता है
मुख्य रूप से तर्पण; देश के अन्य भागों और प्रवासी समाज में भी श्रद्धा से मनाया जाता है।
