परिचय
श्री राम जय राम जय जय राम
राम नवमी विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम का जन्मदिवस है, जिनका जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौसल्या के घर चैत्र शुक्ल नवमी को दोपहर के समय हुआ। यह दिन चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन पड़ता है।
उत्पत्ति
इस पर्व का आधार वाल्मीकि रामायण का बालकांड है, जहाँ राम के जन्म का विस्तृत वर्णन है। तुलसीदास ने रामचरितमानस का लेखन संवत् १६३१ की राम नवमी को अयोध्या में आरंभ किया, जिससे उत्तर भारत में इस दिन का महत्व और बढ़ा। अगस्त्य संहिता और कालनिर्णय जैसे ग्रंथों में राम नवमी व्रत का विधान मिलता है, और यह पर्व सदियों से अयोध्या, चित्रकूट, जनकपुर, भद्राचलम और रामेश्वरम में विशेष रूप से मनाया जाता है।
क्यों मनाया जाता है
राम की पूजा किसी चमत्कार के लिए नहीं, आचरण के लिए होती है। वे पुत्र, भाई, पति, मित्र और राजा — हर भूमिका में मर्यादा का आदर्श हैं, इसीलिए मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हैं। यह दिन याद दिलाता है कि धर्म कठिन परिस्थिति में भी वचन, कर्तव्य और करुणा न छोड़ने का नाम है। रामराज्य की कल्पना — जहाँ कोई दुखी, भयभीत या वंचित न हो — आज भी सुशासन का प्रतिमान मानी जाती है।
कथा
अयोध्या के राजा दशरथ संतानहीन थे। गुरु वशिष्ठ की सलाह से उन्होंने ऋष्यशृंग ऋषि के निर्देशन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया। यज्ञ की अग्नि से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए और उन्होंने खीर से भरा स्वर्ण पात्र दशरथ को दिया। दशरथ ने वह प्रसाद अपनी तीनों रानियों में बाँटा — कौसल्या से राम, कैकेयी से भरत, और सुमित्रा से लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चैत्र शुक्ल नवमी को, अभिजित मुहूर्त में, कर्क लग्न में राम का जन्म हुआ; अयोध्या में उत्सव छा गया और आकाश से पुष्पवृष्टि हुई। इसी अवतार का प्रयोजन था रावण के अत्याचार से पृथ्वी को मुक्त करना।
कहानियाँ और प्रसंग
राम के जीवन की कथाएँ धर्म के अनेक पाठ देती हैं। अहिल्या का उद्धार बताता है कि करुणा शाप से बड़ी है; केवट का प्रसंग कि प्रभु भक्त के हठ के आगे झुक जाते हैं; शबरी के जूठे बेर कि भाव सबसे बड़ा नैवेद्य है। वनवास का आदेश मिलने पर राम का शांत रहना, भरत का चौदह वर्ष सिंहासन खाली रखना, हनुमान का समुद्र लाँघना, जटायु का प्राण देना और विभीषण का धर्म चुनना — ये सब रामकथा के अमर प्रसंग हैं। इसी दिन देश भर में रामलीला और अखंड रामायण पाठ का समापन होता है, और अयोध्या में सरयू स्नान के लिए लाखों लोग आते हैं।
विधि एवं परंपरा
सूर्योदय से मध्याह्न तक व्रत; बालक राम का पालना सजाना और झुलाना; रामचरितमानस, सुंदरकांड और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ; पंचामृत, पंजीरी और केसरिया खीर का भोग; शोभायात्रा और भजन-कीर्तन।
कहाँ मनाया जाता है
सम्पूर्ण भारत — अयोध्या, चित्रकूट, नासिक और रामेश्वरम में विशेष; आंध्र के भद्राचलम में सीता-राम कल्याणम; महाराष्ट्र में रामजन्म कीर्तन।

